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कविता, ग़ज़ल, छंद और मानवीय अनुभूतियों का एक समर्पित साहित्यिक संचय - जहाँ हर रचना एक जीवंत संवाद है और हर पंक्ति आत्मा का विस्तार।
हम क्या साझा करते हैं?
कविता, संस्कृति, यात्रा और समाज - हर विधा में संवेदना और विचारों
का अनूठा संगम जो हमें आपसे, और आपसे हिंदी साहित्य से जोड़ता है।
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।
जिजीविषा
[संज्ञा, स्त्रीलिंग • तत्सम]जीने की अदम्य इच्छा, जीवन के प्रति अगाध प्रेम व घोर संकटों में भी अडिग रहने का अटूट संकल्प।
"हर पतझड़ के बाद जो शाखों में नई कोंपलें फूटती हैं, वह प्रकृति की अदम्य जिजीविषा का ही प्रमाण है।"
चयनित रचनाएँ -
कुछ शब्द जो याद रह जाते हैं और दिल को छू लेते हैं...
काव्य, छंद एवं ग़ज़ल सूत्र -
मात्रा गणना, बहर, रदीफ़-क़ाफ़िया और छंद-विधान के व्यावहारिक सूत्र सीखें
दोहा छंद सूत्र
विषम चरण 13, सम 11 मात्रा | अंत में गुरु-लघु (ऽ ।)
ग़ज़ल का व्याकरण
बहर (वज़न) + हम-क़ाफ़िया व मुस्तकिल रदीफ़
चौपाई छंद विधान
प्रत्येक चरण 16 मात्रा | अंत में 'दो गुरु' (ऽऽ) श्रेष्ठ
मात्रा गणना विज्ञान
ह्रस्व स्वर (1) | दीर्घ स्वर व संयुक्ताक्षर पूर्व (2)