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कविता, ग़ज़ल, छंद और मानवीय अनुभूतियों का एक समर्पित साहित्यिक संचय - जहाँ हर रचना एक जीवंत संवाद है और हर पंक्ति आत्मा का विस्तार।

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शब्द संचय
विचारों के नए प्रतिमान
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लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

— हरिवंश राय बच्चन
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आज का शे'र
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सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।

आज का शब्द

जिजीविषा

[संज्ञा, स्त्रीलिंग • तत्सम]
अर्थ:

जीने की अदम्य इच्छा, जीवन के प्रति अगाध प्रेम व घोर संकटों में भी अडिग रहने का अटूट संकल्प।

प्रयोग:

"हर पतझड़ के बाद जो शाखों में नई कोंपलें फूटती हैं, वह प्रकृति की अदम्य जिजीविषा का ही प्रमाण है।"

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